--- लक्ष्य पर पैनी नजर रखता युवा वर्ग
मधुबनी, संवाद सूत्र : युवा को देश का भविष्य माना गया है। हरेक क्षेत्र में युवाओं की अहम भूमिका होती है। युवा चाहे तो कठिन से कठिन कार्य आसानी से कर सकते हैं। युवाओं को आगे बढ़ते देख परिवार, समाज के लोगों को काफी खुशी होती है। आज के बदलते समय में युवाओं की कार्यशैली में काफी बदलाव आया है। युवाओं की चाहत होती है कि कम से कम समय में ऊंचे से ऊंचे ओहदे पर पहुंचकर अपना नाम रौशन करें। इसके लिए वे हर संभव प्रयास में लगे रहते हैं। छोटे से शहर मधुबनी में भी युवाओं में कम जोश नहीं। यहां के युवक उन सभी मंजिल को पा लेना चाहता है जो संभव हो सके। इसके लिए वे पढ़ाई के क्षेत्र में दिन रात कड़ी मेहनत करते हैं। तरक्की के लिए वे कम्प्यूटर, इंटरनेट का सहारा लेते हैं। सक्षम युवक तो अपने घरों में कम्प्यूटर, इंटरनेट लगा रखे हैं। अक्षम युवक शहर के कैफे का सहारा लेते हैं। रविवार को शहर के कई छात्र-छात्राओं से बातचीत हुई। बातचीत के क्रम में लबालब भरे जोश के साथ अपनी मेहनत और उम्मीद पर अडिग रहने की बात दोहराते हुए छात्र आशीष कुमार कहते हैं कि वे पढ़ाई के साथ बैंकिंग की तैयारी करते हैं। उन्हें विश्वास है कि वे अपने लक्ष्य में जरूर कामयाब होंगे। छात्र दीपक कुमार झा का कहना है कि वे भी पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी नौकरी के प्रयास में लगे हुए हैं। दीपक कहते हैं कि नौकरी की प्राप्ति के बाद अपने माता-पिता का भरपूर सेवा करेंगे। छात्र राबीन कुमार का मानना है कि पढाई के बाद जरूरी नहीं कि सरकारी नौकरी ही जरूरी है। उनका मानना है कि आज के युग में अनेक अवसर हैं। जिससे युवक अपनी बेरोजगारी दूर कर सकते हैं। छात्रा पूजा कुमारी कहती हैं कि इंटर की पढ़ाई करते हुए नौकरी की तलाश में लगी हुई है। कई अवसर भी प्राप्त हुए हैं। लेकिन सरकारी नौकरी प्राप्त करना मुख्य लक्ष्य है। वहीं छात्रा आशा कुमारी बताती हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ बैंकिग की तैयारी में लगी हुए हैं। आशा का मानना है कि कड़ी मेहनत के बाद निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होगी। समय के बदलते परिवेश में युवाओं के आचार-विचार व व्यवहार के संदर्भ में प्रो. अरुण कुमार मिश्र बताते हैं कि बदलते युग में युवाओं में काफी बदलाव आया है। इस बदलाव को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। श्री मिश्र का कहना है कि युवाओं को आगे बढ़ने के लिए उन्हें प्रोत्साहन की जरूरत है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्रता मिलना चाहिए। वहीं प्रो. शंभू नाथ झा का कहना है कि युवाओं में कम से कम समय में बड़ी सफलता पाने की चाहत होती है। ऐसी परिस्थति में उन्हें सावधानी बरतना भी आवश्यक है।
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